जीना क्या जीवन से हारके …

शोभा काफ़ी बहिर्मुखी थी,अपने विचारों को लेकर पक्की भी और अपनी ज़िन्दगी अपने तरीके से जीने वाली… और वही सपना एक सेहमी सी,  बहुत कम बात करने वाली, और सबका मन रखने वाली.. वो कभी अपने विचारों को जताती न थी,जो सब कहे वही ठीक, उसने अपनी इच्छाओ को कभी किसीको नहीं बताया.. पता नहीं …

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