शादी की पहली शर्त…

आकाश और संध्या स्कूल के समय से एकदूसरे के बहोत अच्छे दोस्त थे…  दोनों एक ही गांव के थे शायद इसलिए शहर मे पढ़ने आने के बाद वे दोनों एकदूसरे के साथ ज़्यादा मिलजुल गए थे.. क्योंकि शहर के होस्टेल मे जल्दी से दोस्त बनाना मुश्किल था..  तब से लेके अब तक जब की वो अपने कॉलेज के आखिरी साल मे है, दोनों एक ही स्कूल, कॉलेज और एक ही होस्टेल मे रेहते थे…  इतने सालो मे उनके कई सारे दोस्त बने लेकिन उन दोनों की केमिस्ट्री ही कुछ ओर थी…

पूरे कॉलेज को मालूम हो चूका था की आकाश और संध्या made for each other वाली जोड़ी है… और वे दोनों भी समय के साथ कब पक्के दोस्त से सच्चे प्रेमी बन गए वो खुद भी नहीं जानते थे…  संध्या उच्च विचारों वाली,  समझदार और गांव के प्रतिष्ठित परिवार लड़की है और आकाश भी गांव के एक अच्छे फॅमिली से था..जब भी स्कूल और कॉलेज के वेकेशन आते वे दोनों गांव जाते, लेकिन अलग अलग बस मे,  संध्या पहले अपनी पढ़ाई पूरी करके फीर अपने और आकाश के बारे मे अपने घरवालों से बात करना चाहती थी और आकाश को भी वही ठीक लगा इसलिए वो दोनों गांव जाके एकदूसरे से अकेले मिलते न थे और ना ही ज़्यादा बाते करते… आज आखिरी साल के वेकेशन की शुरुआत थी…  जैसे उन दोनों ने तय किया वैसे आज दोनों एक साथ  एक ही बस मे  गांव के लिए रवाना हुए..  रास्ते मे दोनों ने खूब प्रेमभरी बाते की और संध्या ने आकाश को अपने परिवार वालों से उनके रिश्ते के बारे मे बात करने को कहा.. गांव छोटा होने की वजह से जैसे ही वे दोनों एक साथ बस से  उतरे, लोग बातें करने के लिए जैसे तैयार ही थे.. लोग कुछ भी उल्टा सीधा बोले उससे पहले दोनों ने अपने परिवार वालों को सब कुछ बता दिया.. संध्या के मम्मी पापा ने संध्या को एक बार फीर सोचने को कहा.. लेकिन संध्या काफ़ी पक्की थी अपने इरादों मे, और उसको अपने प्यार पर पूरा यकीन था..  यहाँ आकाश ने अपने मम्मी पापा और भैया भाभी से बात की, पहले तो सब आग बबूला हो गए लेकिन जैसे उनको पता चला के वो लड़की संध्या है, उन्होंने खुश होके तुरंत ही हा बोल दी..  आकाश को विश्वास ही नहीं हुआ की उसके पेरेंट्स इतने जल्दी मान गए.. दूसरे दिन दोनों परिवारो ने मिलने का फैसला किया..  आकाश के घरवाले संध्या के घर पहुँच गए..  घर देख के उनकी आँखे चार हो गई थी.. बहार से तो कई बार देखा था लेकिन अंदर से उतना ही भव्य था संध्या का घर..  आकाश के पापा ने कहा, 

“बेटा आकाश और बेटी संध्या अब तो हम सब आपके रिश्ते से खुश है देखो तभी तो सब मिले है आज… तुम दोनों जाओ थोड़ा साथ मे घूम के आओ…तब तक हम समधी समधन से बात करते है.. है ना !!”

आकाश और संध्या को तो जैसे हरी झंडी मिल गई थी..  वे खुश होके बहार गए…वापिस आए तब तक तो शादी की तारीख फिक्स हो गई थी…फीर तो शादी के काम शुरू हो गए और आकाश और संध्या का प्यार भी दिन ब दिन गहरा होता जा रहा था… 

एकदिन संध्या के पापा कुछ कागज़ पर दस्तखत करके वकील को दे रहे थे… संध्या ने पापा से पूछा 

“क्या हुआ पापा? किसके कागज़ है ये? 

“वो कुछ नहीं बेटा वो हमारी ज़मीन पड़ी है उसे बेच रहा हु”

“लेकिन क्यों? “

“वो तेरी शादी मे ज़रूरत पड़ेगी ना “

“आपको तो पता है ना पापा मे आज की लड़की हु, इतने धूमधाम से शादी करके आपको क़र्ज़ नहीं करने दूंगी “

“अरे बेटा, क़र्ज़ कैसा? तेरा ही तो है सब..और तू आकाश के साथ और उसके परिवार वालों के साथ खुश रहे बस “
PNB

“वो तो मे वैसे भी रहूंगी पापा… आप चिंता ना करे “

शादी का दिन नज़दीक आ गया, कल शादी है और संध्याके पापा ने शहर मे भी ना हुई हो ऐसी शादी के सारे इंतेज़ाम किए थे और संध्या के लिए उसको पूछे बिना ना जाने कितने गहने, कपडे,  घर की सारी चीज़े ले के उसका सामान ट्रक मे भर रहे थे… संध्या बहोत नाराज़ हुई पापा से इतना सारा सामान वो नहीं ले जाना चाहती थी… 

“अरे बेटा ये तो सिर्फ हमारा प्यार है ” तभी उनको एक फ़ोन आया और वो जल्दी से अपने कमरे मे जाने लगे.. थोड़ा परेशान लग रहे थे… संध्या से रहा नहीं गया..वो भी पापा के पीछे पीछे कमरे के पास गई… 

आज शादी का दिन है.. आकाश और उसके परिवार वाले पूरे तीनसौ लोगोकी बारात को लेके आ चुके थे.. यहाँ संध्या भी तैयार हो रही थी, लेकिन कुछ खोई खोई सी थी… जैसे ही पंडित जी ने संध्या को मंडप मे बुलाया, वो चल ने लगी… सामने आकाश, उसका प्यार और उसके परिवार वाले और नए होनेवाले रिश्ते थे और पीछे अपने मम्मी पापा… संध्या मंडप पे आके रूक गई.. 

” पापा मेरे इस होनेवाले रिश्तों और मेरे आकाश के प्रति  प्यार की और मेरे पापा होने की वजह से आप ये सब कुछ हसते हसते सेह लेंगे, आगे भी सेहते रहेंगे लेकिन मे आपकी बेटी हु और कभी ऐसे लालची लोगो के आगे आपको नहीं झुकने दूंगी.. मैने सब सुन लिया है… ज़मीन, कपडे, गहने, गाड़ी, बंगला तो क्या एक फूटी कोड़ी भी आपकी मेहनत की कमाई की मे इनके घर नहीं जाने दूंगी…आकाश, इस लालच की खाई मे मैं अपने आप को नहीं झोंक सकती.. आप सब बारात लेके वापिस जा सकते है “

सही मे, शादी की पहली शर्त यही होनी चाहिए..  जहा दहेज है वहा रिश्तों मे प्यार नहीं बल्कि रिश्तों के सौदे होते है… 

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धन्यवाद !!

monabhatt द्वारा प्रकाशित

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