हेलीकॉप्टर मम्मी

आज टीना ने खूब हिम्मत जुटाई, अपनी माँ को बोल ही दीया, और माँ भी जट से अपना सामान पैक करने लगी,  वापिस जाने के लिए……  टीना एकलौती बेटी है रीमा और राजीव की, टीना राजीव के काफ़ी नज़दीक है,जैसे हर बेटी अपने पापा से होती है मगर रीमा हमेशा टीना का हद से ज़्यादा ही ध्यान रखती.. इकलौती जो थी..  टीना के बचपन से ही रीमा उसके आसपास ही रहती, बचपन मे तो बच्चे को माँ का प्यार चाहिए ही होता है और बच्चा सबसे नज़दिक माँ से ही होता है, लेकिन जैसे जैसे समय बीतता जाता है, वो घरवालों के साथ रहने के अलावा, अपने फ्रेंड्स, अपनी पढ़ाई, अपने शोख पुरे करने में भी व्यस्त होते जाते है, उम्र के साथ साथ जिंदगी में बदलाव भी आते है …  पर यहाँ टीना का किस्सा कुछ ओर ही था, टीना बचपन में तो अपनी मम्मी की लाडली थी ही, लेकिन समय बीतता गया और रीमा का प्यार, टीना की तरफ उसका लगाव बढ़ता ही चला गया.. टीना क्या पहनेगी, क्या खायेगी, कहा खेलेगी, कैसे खेलेगी, किसके साथ दोस्ती करेंगी, कौन सी स्कूल में जाएगी, कौन से कॉलेज मे जाएगी सबकुछ वही तय करती. राजीव को रीमा का यह स्वभाव बिलकुल अच्छा नहीं लगता था. वो रीमा को हमेशा टोकता की बच्ची को कभी अपने मनकी तो कुछ करने दीया करो, तो रीमा बोलती, “आप अपने बिज़नेस को संभालिए, अभी बच्ची ही है वोह, उसे क्या पता क्या सही क्या गलत” तभी राजीव बोलता, “बीस सालो से यही सुनता आ रहा हु, अब तो उसे बड़ी होने दो ” लेकिन रीमा को राजीव की बात से कोई फर्क नहीं पड़ता था वो बस अपनी बेटी के प्यार में जैसे अंधी सी हो गई थी. टीना भी जैसे मम्मी की आदि हो चुकी थी, पहले से ही उसने कोई फैसला अपनेआप नहीं किया था तो वो भी जैसे मम्मी के बगैर कुछ नहीं कर पाती थी..  कॉलेज मे आने के बाद रीमा कई बार टीना से मिलने कॉलेज जाती, कभी कबार तो वो टीना के फ्रेंड्स ने दी हुई पार्टी मे भी जाती..  टीना के फ्रेंड्स भी बोलते, ” टीना तेरी मम्मी भी ना, अब इस पार्टी में वो क्या करेंगी?  टीना को कभी कभी अच्छा ना लगता की उसकी मम्मी हर जगह पहोच जाती थी और हर वक़्त फ़ोन करती के कहा है, क्या कर रही है ये जानने के लिए..  टीना अपनी बचपन की सहेली के यहाँ पढ़ने दूसरी बिल्डिंग में जाती तो भी रीमा खिड़की से जाक कर देखती, जब तक वो ना आती तब तक जगती… टीना मम्मी को बोलती इतना परेशान ना होनेके लिए लेकिन रीमा बोलती, “तू अभी बच्ची है, कुछ नहीं जानती और में तुजसे प्यार करती हु तेरी फ़िक्र करती हु इसीलिए ये सब करती हु ” टीना कुछ नहीं बोल पाती.. आज टीना की शादी हो चुकी है, जय के साथ, जय और टीना एक ही कॉलेज में पढ़ते थे और अब एक ही जगह  नौकरी भी करते है…  रीमा को टीना की जिंदगी में कोई आए और उससे ज़्यादा प्यार करने  लगे, ये बात हज़म नहीं हो रही थी,  क्योंकि इतने सालो में सिर्फ वही थी जो टीना के साथ परछाई की  तरह रहती  थी लेकिन अब जय भी है.. जय अच्छा और समझदार लड़का है,  वो जानता था की टीना की मम्मी उससे बहोत प्यार करती है और थोडी possessive है टीना को लेकर… टीना को शादी के बाद घर जैसा ही लगे, अकेलापन ना हो इसलिए जय ने अपनी सास यानि टीना की  मम्मी को कुछ दिन साथ रहने को कहा.. रीमा तो तैयार ही थी, तुरंत ही पहोच गई… टीना ने थोड़े दिनों की छुटटी ली हुई थी, नई शादी और नये घर को सँभालने के लिए, जय के पेरेंट्स तो अमेरिका रहते थे, इसलिए शादीके बाद वे लोग वापिस चले गए और जय को कम्पनी का फ्लैट मिला था तो उसको सजाने मे टीना लगी हुई थी.. टीना जय से बहोत प्यार करती है और घर सजाने में भी वो जय की पसंद का ख्याल रखती,  टीना और उसकी मम्मी बाज़ार जाते शॉपिंग को तो टीना को कुछ अच्छा लगे तो वो तुरंत जय को फ़ोन करती और उसकी पसंद का लेती, सुबह उठकर वो जय को टिफ़िन बना देती, और उसकी पसंद के कपड़े जय के लिए निकालके रखती, जय भी टीना को बाहर डिनर पे, कभी शॉपिंग पे या कभी ऐसे ही लॉन्ग ड्राइव पर ले जाता.. कभी कभी रीमा भी जाती उनदोनो के साथ.. टीना के साथ रहके रीमा को लगने लगा जैसे टीना अपनी जिंदगी में ही डूबी हुई है, और उसका प्यार टीना को दिख ही नहीं रहा है.. जय को एक पांच दिनों की टूर में शहर से बाहर जाना था, उसे टीना को छोड़के जाना था इसलिए सोच रहा था की मना करदे, लेकिन रीमा बोली वो टीना के साथ रहेगी इसलिये जय बेफिक्र होके गया.. जैसे ही जय टूर पे गया, रीमा ने टीना को जय के बारे में अनाब शनाब बोलना शुऊ किया… टीना ने उनकी बातो पे बहोत ध्यान नहीं दीया, तभी रात को जय का फ़ोन आया, वो टीना को बहोत miss कर रहा था.. और टीना भी.. दूसरे दिन ज़ब टीना और जय फ़ोन पे बात कर रहे थे तभी रीमा ने कुछ ड्रामा करके फ़ोन की बात को रोक दीया, ऐसे ही वो या तो जय के या उसके परिवार के बारे में कुछ ना कुछ  बोलकर टीना को भड़काती रही.. वो टीना को बोलती के जय का प्यार नाटक है, सिर्फ वही है जो टीना का सबसे ज़्यादा ध्यान रखती है.. आखिर एक दिन उनसे रहा नहीं गया और उसने टीना को तलाक लेने की सलाह दी और कहा की जय उसके लायक नहीं है, उसे छोड़दे, टीना के पाँव के नीचे से ज़मीन हिल गई, अब वो जय को और अपनी मम्मी के पागलपन से भरे प्यार को समझ गई थी, और पेहली बार अपनी मम्मी को उसने आईना दिखाया, ” मम्मी, आज तक में तुम्हारे मुताबिक अपनी जिंदगी जीते आई हुँ , मुझे लगा तुम मुजसे इतना प्यार करती हो इसलिए मेरी भलाई के लिए ही सब केहती होंगी, तुम्हे दुःख ना पहोचे इसलिए मैंने वही किया जो तुमने कहा, जय तुम्हे अपनी माँ की तरह समझता है, और में अकेली ना हो जाऊ इसलिए उन्होंने तुम्हे यहाँ बुलाया, और तुम उसके खिलाफ ही बोल रही हो !! मैंने अपनी नई ज़िंदगी की अभी शुरुआत ही की है और आप उसे छीनना चाहती है और वो भी इसलिए क्योंकि कोई और भी है जो मुझे आप जैसा प्यार करता है… उसका प्यार आप जैसा नहीं है आपसे भी कई ज़्यादा है, क्योंकि उसने कभी आपको या आपके प्यार को  ग़लत नहीं समजा..आज में एक बेटी होने के नाते आपसे केहती हु की आप हमारी जिंदगी में दखल ना दे,मेरे परिवार को में संभाल लुंगी मम्मी, और जय बहोत ही अच्छे इंसान है ये बात जान लीजिए और हमें ख़ुशी से अपनी जिंदगी जीने दे… आते रहिएगा मम्मी “

दोस्तों कभी कभी मम्मी पापा का हद से ज़्यादा प्यार और सलाहे बच्चो के जीवन को खोखला बना देती है.. बच्चों के  ऊपर हरवक़्त हेलीकॉप्टर की तरह मंडराना अच्छी बात नहीं है. उनको नई सोच और पँख दीजिए,अपने आप उड़ने के लिए….. 

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धन्यवाद !

monabhatt द्वारा प्रकाशित

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